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घटनाक्रम में कोलकाता नगर निगम (केएमसी) में उनके नाम के बोर्ड को भी उनके चेम्बर से हटा दिया गया है
कोलकाता। आरजी कर मेडिकल कॉलेज की एक महिला डॉक्टर की बलात्कार और हत्या के मामले ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल मचा दी है। इस घटना के बाद तृणमूल कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सांसद और आरजी कर अस्पताल के रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ. शांतनु सेन को पद से हटाए जाने की अटकलें तेज हो गई थीं। अब ताजा घटनाक्रम में कोलकाता नगर निगम (केएमसी) में उनके नाम के बोर्ड को भी उनके चेम्बर से हटा दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक, डॉ. शांतनु सेन के नाम का बोर्ड शनिवार को कोलकाता नगर निगम के स्वास्थ्य सलाहकार के रूप में उनके कार्यालय के दरवाजे से हटा दिया गया। इस घटना को लेकर जब शनिवार को 'टॉक टू मेयर' कार्यक्रम में मेयर फिरहाद हकीम से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि "कोलकाता नगर निगम में स्वास्थ्य सलाहकार के नाम पर कोई पद नहीं है। केवल एक ही स्वास्थ्य सलाहकार हैं, और वह हैं डॉ. टी. के. मुखोपाध्याय।" हालांकि, उन्होंने डॉ. शांतनु सेन के पद के बारे में कुछ नहीं कहा, जिससे यह अटकलें तेज हो गईं कि आरजी कर अस्पताल कांड में उनके शुरू से विरोध जताने के कारण उन्हें इस पद से हटाया गया है।
क्या कहना है शांतनु सेन का?
इस बारे में प्रतिक्रिया के लिए जब हिन्दुस्थान समाचार की ओर से शांतनु सेन को कॉल किया गया तो उन्होंने कहा कि इस मामले में वह कुछ नहीं कहेंगे। उनसे आरजी कर के 43 डॉक्टरों के तबादले के बारे में भी जब सवाल पूछा गया तो उन्होंने तुरंत फोन काट दिया और उसके बाद फोन उठाया ही नहीं।
उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग ममता बनर्जी का है और इसमें खामियों के बारे में शांतनु सेन ने खुलेआम बात की थी जिसकी वजह से उन्हें सजा दी जा रही है।
डॉ. सेन हाल के दिनों में आरजी कर अस्पताल के डॉक्टरों के समर्थन में खुलकर सामने आए थे। उन्होंने बुधवार को इस्तीफा देने वाले प्रिंसिपल संदीप घोष के खिलाफ भी अपनी नाराजगी जताई थी और यह दावा किया था कि आरजी कर अस्पताल में पढ़ाई नहीं हो रही है। इस घटना से राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं, और डॉ. सेन ने इस पर असंतोष प्रकट किया था।
तृणमूल कांग्रेस के नेता जयप्रकाश मजूमदार ने गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस में बताया था कि डॉ. शांतनु सेन को पार्टी के प्रवक्ता पद से हटा दिया गया है। अब, कोलकाता नगर निगम में भी उनकी जगह नहीं रही है।